इस्लामी क्रांति संरक्षक बल की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी ने शनिवार को किरमान शहर के पूर्व इमामे जुमा आयतुल्लाह जाफ़री को श्रद्धांजली अर्पित करने के लिए आयोजित होने सम्मेलन में कहा कि इस्लामी क्रांति पिछले चालीस बरसों में निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ईरान की इस्लामी व्यवस्था स्वाधीनता, स्वतंत्रता और साम्राज्य विरोध में संसार की अन्य शासन व्यवस्थाओं से अलग है और इस दृष्टि से उसके बहुत से दुश्मन हैं।
उन्होंने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि सभी धर्मों में धर्मगुरुओं का एक विशेष स्थान है, कहा कि प्रायः इस प्रकार के लोगों को समाज में कुछ ख़ास विशेषताएं हासिल होती हैं और उनमें से कुछ विरासत में भी मिलती हैं जैसे आले सऊद में यह विशेषताएं उन्हीं के परिवार के कुछ लोगों को हासिल होती हैं। जनरल सुलैमानी ने कहा कि एकमात्र मत जिसमें वर्गभेद नहीं है, शिया मत है। उन्होंने कहा कि अहले सुन्नत में अलअज़हर विश्वविद्यालय के प्रमुख को, एक वरिष्ठ धर्मगुरू होता है, सरकार नियुक्त करती है जो सरकार के अधीन होता है लेकिन शिया धर्म में ऐसा नहीं है।
इस्लामी क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद के चालीस साल का समय इस प्रकार से गुज़रा है कि उसके ख़िलाफ़ कभी भी दुश्मनी नहीं रुकी है और हर साल ईरान के ख़िलाफ़ नई शत्रुताएं शुरू हो जाती हैं।